प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में बार कोड से वोटर की पहचान की जा सकती है। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए प्रदेश में पुराने वोटरकार्ड को बदलकर बारकोड युक्त रंगीन प्लास्टिक कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस साल के अंत तक प्रदेश के करीब 5 करोड़ मतदाताओं को नए कार्ड मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है।
ऐसा माना जा रहा कि आयोग लक्ष्य प्राप्त करने में सफल रहा तो अगले चुनाव में वोटर को बार कोड वाला कार्ड लेकर ही मतदान केंद्र में जाना होगा। जहां बूथ प्रभारी बार कोड से पहचान के बाद ही मतदान की अनुमति देगा। इस बदलाव का मकसद वोटर आईडी के बढ़ते दुरुपयोग को पूरी तरह से रोकना है।
प्रदेश सयुंक्त मुख्य चुनाव अधिकारी एसएस बंसल के मुताबिक राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के सभी 51 जिलों में बार कोड युक्त रंगीन फोटो वाले मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए अभियान शुरू किया जा रहा है। जिला स्तर पर चलने वाले इस अभियान के तहत ब्लैक एंड ह्वाइट वोटर कार्ड को जमा कराकर मतदाताओं को प्लास्टिक का बार कोड युक्त रंगीन फोटो वाला वोटर कार्ड दिया जाएगा।
इसके लिए मतदाताओं से फॉर्म-8 भरवाकर 25 रुपए का शुल्क भी लिया जाएगा। प्रदेश में अब तक करीब 56 लाख मतदाताओं को प्लास्टिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं या उनके फॉर्म-8 जमा होने के बाद नए कार्ड बनने की प्रक्रिया में आ चुके हैं। सतना जिला में सर्वाधिक 2 लाख वोटर्स को बारकोड युक्त प्लास्टिक कार्ड जारी हुए हैं, जबकि भोपाल में सबसे कम सिर्फ 520 लोगों के ही नए कार्ड बने हैं। जबकि राजधानी में 20 लाख 63 हजार से अधिक मतदाता हैं।
मोबाइल स्कैनर से भी जान सकेंगे वोटरकार्ड असली या नकली
नय कार्ड असली है या नकली इसकी जांच मोबाइल फोन के स्कैन एप से भी की जा सकेगी। वोटरकार्ड के बार कोड को स्मार्ट फोन के बार कोड स्कैनर से रीड करने पर स्क्रीन पर संबंधित व्यक्ति का ईपिक नंबर दिखाई देगा। यदि मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला नंबर और वोटरकार्ड में लिखे नंबर में कोई भी अंतर पाया जाता है तो वोटरकार्ड के साथ की गई किसी भी तरह की छेड़छाड़ या डुप्लीकेसी को पकड़ा जा सकेगा।
वहीं पहचान के रूप में उपयोग होने पर कार्ड के ईपिक नंबर से निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के जरिए सत्यापित किया जा सकेगा। जानकारी में अंतर पाए जाने पर इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से की जा सकती है।
