नई दिल्ली: देश में विकास के शोर के बीच एक बड़ी हकीकत छुपी रह जा रही है. भारत में पिछले दिनों बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है और पेशेवर लोग छंटनी के शिकार हो रहे हैं. इस पर संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने भी चिंता जताई है. हालांकि सरकार अब भी बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने का दावा कर रही है.
सोमवार को कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने ऐलान किया कि उनका मंत्रालय अगले तीन साल में टेक्सटाइल सेक्टर में एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करेगा. लेकिन इन आश्वासनों और दावों के बावजूद रोजगार के घटते मौके संघ परिवार के भीतर ही सवाल पैदा कर रहे हैं.
गुवाहाटी में रविवार को खत्म हुई स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया है कि देश में आर्थिक विकास दर 7.1% है लेकिन रोजगार बढ़ोतरी सिर्फ 1%. हर साल 1.25 करोड़ युवा रोजगार के लिए तैयार होते हैं. आईटी सेक्टर में हो रही छंटनी चिंता की बात है. स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अश्विनी महाजन ने एनडीटीवी से कहा कि इसके लिए एफडीआई और कारपोरेट सेक्टर पर टिकी अर्थव्यवस्था है. महाजन के कहा कि सरकार को अब छोटे उद्योगों के विकास पर ध्यान देना होगा और हर साल सवा करोड़ नए युवा कर्मियों के लिए रोजगर के अवसर पैदा करने होंगे.
उधर नीति आयोग ने माना है कि रोजगार को लेकर चिंता जायज़ है. आयोग में लैंड लीज़िंग कमेटी के चेयरमैन टी हक ने एनडीटीवी से कहा, "आईटी सेक्टर में लोकल और इंटरनेशनल स्तर पर प्राब्लम है. अर्थव्यवस्था में निजी निवेश की जितनी उम्मीद थी उतना हुआ नहीं है...कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी रोजगार के अवसर कम हुए हैं."
इसका असर कैंपस प्लेसमेंट पर भी दिखने लगा है. आईआईटी चेन्नई में 2015-16 में 65% छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट में नौकरी मिली थी जो 2016-17 में घटकर 62% रह गई...यानी हर दस छात्र में सिर्फ छह को नौकरी मिली.
नीति आयोग ने अपने तीन साल के एक्शन प्लान में रोजगार बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सरकार के सामने रखे हैं जिसमें स्किल डेवलपमेंट से लेकर श्रम कानूनों में बदलाव की सिफारिश शामिल है. अब देखना होगा कि सरकार रोजगार के बढ़ते संकट से निपटने के लिए कितनी जल्दी पहल करती है.
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Source :NDTVइंडिया
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नीति आयोग ने अपने तीन साल के एक्शन प्लान में रोजगार बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सरकार के सामने रखे हैं जिसमें स्किल डेवलपमेंट से लेकर श्रम कानूनों में बदलाव की सिफारिश शामिल है. अब देखना होगा कि सरकार रोजगार के बढ़ते संकट से निपटने के लिए कितनी जल्दी पहल करती है.
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Source :NDTVइंडिया
