राहुल गांधी ने पहली बार कहा, मैं प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने को तैयार हूं

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पहली बार कहा है कि अगर पार्टी कहेगी तो वह प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने को तैयार हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2012 में कांग्रेस पार्टी में घमंड आ गया था और पार्टी ने जनता से संवाद कम कर दिया, जिसके चलते आम लोगों से दूरी बन गई. अमेरिका दौरे पर गए राहुल गांधी ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में छात्रों को संबोधित करते हुए विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे. इस कार्यक्रम का विषय 'इंडिया ऐट 70: रिफलेक्शन ऑन द पाथ फॉरवर्ड' था. इसमें राहुल ने समकालीन भारत और इसके आगे के सफर के बारे में अपना नजरिया रखा.

राहुल गांधी ने कहा कि देश में आज नफरत और हिंसा की राजनीति का बोलबाला है. लेकिन हिंसा से किसी का भला नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि हिंसा में मैंने अपनी दादी (इंदिरा गांधी) और पिता (राजीव गांधी) को खोया. मुझसे बेहतर हिंसा को कौन समझेगा. उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने मेरी दादी को गोली मारी, मैं उन लोगों के साथ बैडमिंटन खेलता था. मुझे पता है कि हिंसा से क्या नुकसान हो सकता है. जब आप अपने लोगों को खोते हैं, तो आपको गहरी चोट लगती है.'

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि अहिंसा की विचारधारा आज खतरे में है, हालांकि यही एक ऐसी विचारधारा है जो मानवता को आगे ले जा सकती है. मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संसद को अंधेरे में रखकर नोटबंदी लागू की गई. नोटबंदी से फायदे की बजाय जीडीपी में गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने RTI को 'बंद' कर दिया है.


राहुल गांधी ने कहा, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कंप्यूटर के बारे में बात की थी, उसका विरोध हुआ था. बीजेपी के नेता जो बाद में भारत के पीएम बने थे, उन्होंने भी कंप्यूटर का विरोध किया था.

Source : NDTV इंडिया 

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