'सौभाग्य' योजना: हर घर बिजली योजना, सच है या केवल एक सपना?

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 'प्रधानमंत्री सहज हर घर बिजली' यानी 'सौभाग्य' योजना का शुभारंभ करते हुए 2019 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का ऐलान किया था. लेकिन क्या मार्च 2019 तक गांव-गांव और घर-घर बिजली पहुंच पाएगी. क्योंकि आज भी 4 करोड़ से ज्यादा घरों में आज भी बिजली नहीं है. 1947 में केवल 1500 गांवों में बिजली थी. 1947 से 2004 तक 4.75 लाख गांवों यानी 81 फीसदी गांवों में बिजली पहुंच चुकी थी. 

2005 में यूपीए सरकार आई और उसने 2010 तक एक नई योजना के तहत 1.23 लाख गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा था. यूपीए के नौ साल के कार्यकाल में 1.10 गांवों में बिजली पहुंची यानी हर साल औसतन 12 हज़ार गांव बिजली से रोशन हुए. इस सरकार में 2005 से 2012 तक यानी पहले सात साल औसतन 15 हज़ार गांवों में बिजली पहुंचाई गई. लेकिन उसके बाद दो सालों में सिर्फ दो हज़ार गांवों में बिजली पहुंचाई गई. 

इस सरकार ने बीपीएल परिवारों को बिजली देने का लक्ष्य रखा था और वह भी बिल्कुल मुफ्त. मनमोहन सरकार ने 2.30 करोड़ परिवारों से 89 फीसदी परिवरों में बिजली का बल्ब जलाने का काम किया. लेकिन जो लोग बीपीएल से ऊपर थे वे थे 1.82 करोड़ परिवारों में से सिर्फ 15 लाख परिवारों को बिजली दी गई. यानी लक्ष्य का सिर्फ 8 फिसदी. दोनों आंकड़े मिलाकर केवल 54 फीसदी परिवारों को यूपीए में बिजली मिल सकी थी. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि कांग्रेस पिछले 60 सालों में 18 हज़ार गांवों में बिजली नहीं पहुंचा पाई. ये 18 हज़ार गांव भारत के कुल 6 लाख गांवों का सिर्फ 3 फिसदी होते हैं. यानी 2014 में सिर्फ 3 फीसदी (18452) गांवों में बिजली पहुंचाना बाकि था. लेकिन 23 फीसदी ग्रामीण परिवारों के पास बिजली नहीं आती थी. इन 23 फीसदी परिवारों की संख्या 4 करोड़ के आसपास बैठती है. गांव के विद्युतीकरण के लिए सरकार को केवल 10 फिसदी घरों में बिजली के कनेक्शन देकर पूरे गांव का विद्युतीकरण हो चुका है. 

वर्तमान सरकार को जो लक्ष्य मिला था उसके तहत 2014 से 2017 तक 18,452 घरों में से 14,483 गांवों में बिजली पहुंच चुकी है यानी 78 फीसदी लक्ष्य पूरा किया जा चुका है. लेकिन इन गांवों में भी केवल 1180 गांवों में सभी परिवारों को बिजली मिली है. यानी कुल 8 फीसदी गांवों को सौ फीसदी विद्युतीकरण हुआ है. 

अगर दोनों सरकारों यानी यूपीए और एनडीए का बिजली पहुंचाने का स्ट्राइक रेट देखा जाए तो मनमोहन सरकार में हर साल 12 हज़ार गांवों में बिजली पहुंचाई गई जबकि मोदी सरकार में यह आंकड़ा 48 सौ गांव का रहा है. यानी यूपीए से यह सरकार फिसड्डी साबित हुई है. बीपीएल ग्रामीण परिवारों की बात करें तो 23 लाख परिवारों को बिजली दी गई और मोदी सरकार में केवल 17 लाख परिवारों को सालाना बिजली कनेक्शन मुहैया कराए गए. 

इसका कारण यह ये कि शुरूआत में जिन गांवों का विद्युतीकरण हुआ वे संसाधनों की पहुंच में थे, फिर दूरदराज के गांवों का विद्युतीकरण किया गया, जिससे बाद में विद्युतीकरण का आंकड़ा गिर गया. अक्टूबर, 2012 में मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि 2017 तक सभी के पास हम आसान बिजली मुहैया करा देंगे.  


Source : NDTV इंडिया 

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