रामायण हम सभी ने कभी-न-कभी पढ़ी या देखी हुई है. इसके सारे किरदारों से भी परिचित है. इन्ही में से एक है महाबली हनुमान. हनुमान को महाबली इस लिए कहा जाता है है क्योंकि हम सब ये समझते है की उन्होंने आजतक कोई युद्ध नही हारा. हनुमान की बल की बात करे तो बचपन में उन्होंने लड्डू खाने के लालच में आकर सूरज को निगल लिया था.
हनुमान ने एक बार अपने बल का परिचय देते हुए संजीवनी बूटी का पूरा पहाड़ ही उठा लाये थे. हनुमान भगवान् राम के परम भक्त थे, इसीलिए जब एक बार उनकी भक्ति की परीक्षा हुई तो उन्होंने अपना सीना चीर के यह दिखा दिया की उनके सीने के भीतर भगवान राम और माता सीता बसती है.
आज जो हम आपकी कहानी बताने जा रहे है की वह है महाबली हनुमान के उस युद्ध के बारे में जिसमे उन्हें हार मिली थी. यह युद्ध हनुमान और मछिंद्रानाथ के बीच हुआ था. दरअसल, मछिंद्रानाथ एक बार रामेश्वरम आये थे वहां पर उन्होंने राम सेतु देखा. यह सेतु देखकर वह काफी प्रसन्न हो गए. यह देखते ही वह राम जि की भक्ति में लीं होकर समुद्र में स्नान करने लगते है.
मछिंद्रानाथ को पानी में नहाते हुए देख मारुती की नज़र उनपर पड़ती है. मारुति वहां पर एक बूढ़े वानर के भेष में आये हुए थे. मारुती यह बात जानते थे की मछिंद्रानाथ एक सिद्ध योगी थे. यह जानते हुए भी वह उनकी शक्ति की परीक्षा लेना चाहते थे. हनुमान अपनी लीला से ज़ोरदार बारिश करने लगते है. बारिश आने के बाद उससे बचने के लिए हनुमान एक पहाड़ पर ज़ोरदार प्रहार करने लगते है. प्रहार कर वह उसमे गुफा बनाने लगते है. यह देख मछिंद्रानाथ हनुमान से कहते है की प्यास लगने पर कुआं नहे खोदा जाता.
हनुमान और मछिन्द्रनाथ के बीच बीच बहस बढ़ जाती है. वृद्ध वानर के रूप में हनुमान उनसे कहते है की उनके पास महाबली हनुमान द्वारा दी गयी 1 फीसदी शक्ति है और अगर वह बलवान है तो उनसे युद्ध करे. मछिन्द्रनाथ यह स्वीकार कर लेते है. दोनों के बीच युद्ध शुरू होता है. हनुमान जब पहाड़ लेकर मछिंद्रा के ऊपर फेकने गये तो मछिंद्रा ने समुद्र से जल निकालकर वाताकर्षण मन्त्र पढ़कर उनकी ओर फ़ेंक दिया. इस मन्त्र से हनुमान जि का शरीर स्थिर हो गया. स्थिर होने के कारण उनकी सारि शक्तियां ख़त्म होने लगी.
हनुमान जी की यह हालत देखकर उनके पिता वायु देव राम सेतु पहुँच गए. उन्होंने मछिन्द्रनाथ से प्रार्थना करके हनुमान के प्राण बचा लिए. हनुमान भी अपने असली रूप में आ गए. उन्होंने मछिन्द्रनाथ से क्षमा मांगकर कहा की मई जानता था की आप नारायण का अवतार है. मई बस आपकी शक्तियों की परीक्षा ले रहा था.