वामपंथी और हिन्दू विरोधी भारत में चाहे कितना ही शोर मचा लें मगर वो सनातन धर्म के रहस्यों को अपने कुतर्कों से झूठला नहीं सकते। सनातन हिन्दू धर्म के कई प्राकृतिक शक्तियों तक कोई नहीं पहुंच नहीं सका है। ढेरों ऐसे कारनामें हुए हैं, जिन पर दिमाग लगाना सिर्फ आस्था की अलख दिल में जगाना है। कुछ ऐसा ही रहस्य समेटे है राजस्थान स्थित ये चमत्कारिक मंदिर जिस पर पाक ने हजारों तोप के गोले बरसाए, मगर मंदिर का कुछ नहीं बिगड़ा।
जी हाँ, भारत-पाकिस्ताान सीमा के पास स्थित जैसलमेर में सिद्ध तनोट राय माता के इस मंदिर पर 1965 और 1971 की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान की ओर से कई बार बम फेंके गए मगर हर बार उसे असफलता ही हाथ लगी। इन बमों को आज भी मंदिर के संग्रहालय में रखा हुआ है, जो फेंकने के बाद भी फटे नहीं थे।
मंदिर को उड़ाने का सपना पाले पाकिस्तान ने कोशिश की थी वो भी एक-दो नहीं बल्कि हजारों बार, मगर हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी। जैसलमेर के थार रेगिस्तान में 120 किमी. दूर भारत-पाक सीमा के पास स्थित यह मंदिर से भारत-पाक युद्ध की कई यादें समेटे हुआ है।
इसी कारण राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को परास्त करने में तनोट माता के इस मन्दिर की भूमिका बड़ी अहम मानी जाती है। बल्कि माना यह तक जाता है कि युद्ध के दौरान तनोट राय माता मन्दिर में हुए चमत्कारों के कारण ही इस सीमा से पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा था।
सबसे पहले साल 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान 17 से 19 नवंबर तक पाकिस्तान की ओर से तनोट राय माता मंदिर पर भारी बमबारी की गई। लड़ाई के दौरान पाकिस्तान की तरफ जबर्दस्त आग उगलती तोपों से गिराए गए करीब 3000 बम भी इस मंदिर में खरोच तक नहीं ला सके, यहां तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे तक नहीं।
कहा जाता है कि उस दौरान तनोट राय माता की रक्षा के लिए मेजर जय सिंह की कमांड में 13 ग्रेनेडियर की जो कंपनी और सीमा सुरक्षा बल की दो कंपनियां दुश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थीं, वे मन्दिर के अंदर ही मौजूद थी। जिन्हें बार बार निशाना बनाने के लिए पाक की ओर से ये नाकाम कोशिशें हुयी थी।
इस सीमा पर कब्जा करने के उद्देश्य से पाकिस्तान की सेना ने भारत के इस हिस्से पर जबर्दस्त हमले किए मगर उन्हें कामयाबी नहीं मिली। लेकिन अब तक गुमनाम रहा यह स्थान युद्ध के बाद प्रसिद्ध हो गया। युद्ध के दौरान 4 किमी. अंदर तक भारतीय सीमा में घुस आई पाकिस्तानी सेना को नाकाम बमबारी से काफी नुकसान पहुंचा और वह पीछे लौट गई।
इसके बाद ही माता का यह मन्दिर जो अब तक सुरक्षा बलों का कवच बना रहा, युद्ध समाप्ति पर सुरक्षा बल इसका कवच बन गए। बता दें कि इसके बाद मंदिर को बीएसएफ ने अपने नियंत्रण में ले लिया। आज यहां का सारा प्रबन्ध भारतीय सीमा सुरक्षा बल के हाथों में है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहाँ पुजारी भी सैनिक ही है। उस दौरान युद्ध में हमला करने वाले पाकिस्तानी सेना के फौजियों के लिए भी यह आस्था का केन्द्र रहा है।
