भारत में शादियां बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है. यहां होने वाली शादियों में बहुत ज्यादा पैसे भी खर्च होते हैं. भारत में शादी के बन्धन को जितना महत्व दिया जाता है उतना ही इसके आयोजन को भी. दूल्हा और दुल्हन पक्ष वाले सभी चाहते हैं कि शादी अच्छे से संपन्न हो जाए. लेकिन क्या हो अगर शादी के वक्त बारिश होने लग जाए.
वैसे शादी के दिन होने वाली बारिश, विवाह आयोजन के लिए थोड़ी परेशानी का सबब जरूर बनती है. इससे विवाह की तैयारियों में बांधा उत्पन्न होती है और यही वजह है कि दूल्हा-दुल्हन से लेकर घराती और बराती जिस बात की सबसे ज्यादा चिंता करते हैं, वो ये है कि अगर शादी में बारिश हो गई तब क्या होगा? लेकिन हम आपको बता दें कि शादी में हो रही बारिश आपको थोड़ा बहुत परेशान भले ही करती है पर वास्तव में ये बहुत अच्छा सगुन होती है. असल में बारिश प्रकृति का दिया हुआ विशेष संकेत है. आइए जानते हैं इस विशेष संकते का अभिप्राय.
जिस तरह वर्षा धरती के लिए फलदायी होती है वैसे ही ये विवाह आयोजन के लिए भी अच्छे भाग्य का प्रतीक है. इसका मतलब है कि जिस प्रकार धरती के सूखे को खत्म करने के लिए बारिश होती है, बंजर जमीन भी फसलों से लहलहा उठती है उसी तरह ये बारिश की बूंदो के रूप में ईश्वर का आर्शीवाद बरसता है जो कि विवाह की सफलता का सूचक है और ये प्रकृति की तरफ से वर वधु दोनो को दिया गया शुभ सगुन है.
बारिश वास्तव में समृद्धी का प्रतीक है. ये शारीरिक और भौतिक दोनों रूपों में समृद्धि का संकेत है. इस तरह शादी के दिन होने वाली बारिश सुख समृद्धि का प्रतीक है. इसका अभिप्राय ये है कि ये शादी ना सिर्फ सफल रहेगी बल्कि वर वधु का दाम्पत्य जीवन खुशहाल और समृद्ध रहेगा.
शादी के दिन होने वाली बारिश परिवार के बढ़ने का भी संकेत देती है. दरअसल बारिश का पानी जिस तरह से फसलों के लिए उपजाउ साबित होता है उसी तरह बारिश भी नव दम्पत्ति के परिवार का बढ़ने का संकेत है.
इसके साथ ही शादी के दिन होने वाली बारिश को लेकर हिन्दू संस्कृति में एक मान्यता ये भी है कि शादी के दिन हो रही बारिश की बूंदे अगर वर-वधु को बांधने वाली ‘कन्यादान की गांठ’ पर पड़ जाती है तो उनका रिश्ता और मजबूत हो जाता है.
