आजकल किसी के चेहरे के हावभाव से कुछ नहीं पता चलता है। आप किसी के चेहरे के हाव भाव देखकर या फिर आवाज सुनकर ये पता लगा सकते है्ं कि वो सच कह रहा है या झूठ। लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि टेक्स्ट मैसेजों को देखकर सच या झूठ बताओ तो आपके लिए ये करना बेहद मुश्किल होगा। लेकिन शोधकर्ताओं ने इसका भी एक तरीका निकाल लिया है।
आजकल मैसेज का क्रेज बढ़ गया है। लोगों के टैक्स्ट मैसेज इकट्ठा करने के लिए एक एंड्रॉयड मैसजिंग ऐप बनाया गया । इस ऐप के जरिए कुल 1,703 टैक्स्ट लिखित बातचीत को इकट्ठा किया गया। इसमें से उन मैसेज को अलग कर दिया गया जिसमें झूठ नहीं बोला गया था। बाकी बचे लगभग 351 झूठे मैसेजों को स्टडी किया गया।
पुरुष और महिलाएं अलग-अलग तरह से झूठ बोलते हैं। इस शोध में पाया गया कि आम तौर जब लोग मैसेज पर बातचीत के दौरान झूठ कहते हैं तो ज्यादा शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा झूठे मैसेज में 'मैं', 'मेरा', 'तुम', 'आप' और 'हो सकता है', 'शायद' जैसे शब्द ज्यादा होते हैं। रिसर्च के मुताबकि झूठे टेक्स्ट मैसेज में 8 शब्द होते है, वहीं सच्चे संदेशों में 7 शब्द होते हैं।
इसी तरह जब महिलाएं सच कहती हैं तो अपने मैसेज में 8 शब्द लिखती हैं, लेकिन झूठ कहते हुए ऑसतन वो 9 शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि पुरुषों में सच-झूठ का पता लगाना मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुरुष सच्चे और झूठे दोनों तरह के मैसेजों में 7 शब्दों का ही प्रयोग करते हैं। इस तरह आप इन बातों से व्यक्ति के अस्तित्व की पहचान कर सकते है।
