ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पौष मास में जब सूर्य कुंभ राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो यह पर्व मकर संक्रांति के नाम से अभिहित किया जाता है। मकर संक्रांति के पर्व को जिस प्रकार भारत के विभिन्न भागों में अन्य नामों से जाना जाता है। ठीक उसी प्रकार इस पर्व के अवसर पर तिल का भी अन्यान्य महत्व है। मकर संक्रांति के दिन तिल का खास महत्त्व माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि मकर संक्रांति के अवसर पर तिल का सेवन करना ही चाहिए। इस दिन पर तिल का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी खास महत्व है।
मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करने अशुभ ग्रह कट जाते हैं। शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करने से शनि के कुप्रभाव कम होते हैं। इस दिन तिल के सेवन से पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही मकर संक्रांति के दिन तिल मिश्रित जल के स्नान करने से विभिन्न रोगों का नाश होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसी मान्यता है कि माघ मास में तिल और जल मिलकर भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के समस्त कष्टों का नाश हो जाता है। साथ ही राहु और शनि के दोष का भी नाश होता है। इसके अलावे भी तिल का अत्यधिक महत्व है।
गठिया के लिए रामबाण
तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक चौथाई कप या 36 ग्राम तिल के बीज से 206 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावे जिन्हें गठिया रोग की शिकायत बहुत अधिक है, उन्हें तिल का सेवन करने से आराम मिलता है।
सर्दियों में लाभदायक
सर्दी से राहत सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है। ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को बैलेंस करना होता है। तिल और गुड़ गर्म होते हैं, ये खाने से शरीर गर्म रहता है। सर्दी के मौसम में तिल और गुड़ से बने लड्डू खाने से जुकाम और खांसी में काफी आराम मिलता है।
मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करने अशुभ ग्रह कट जाते हैं। शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करने से शनि के कुप्रभाव कम होते हैं। इस दिन तिल के सेवन से पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही मकर संक्रांति के दिन तिल मिश्रित जल के स्नान करने से विभिन्न रोगों का नाश होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसी मान्यता है कि माघ मास में तिल और जल मिलकर भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के समस्त कष्टों का नाश हो जाता है। साथ ही राहु और शनि के दोष का भी नाश होता है। इसके अलावे भी तिल का अत्यधिक महत्व है।
गठिया के लिए रामबाण
तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक चौथाई कप या 36 ग्राम तिल के बीज से 206 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावे जिन्हें गठिया रोग की शिकायत बहुत अधिक है, उन्हें तिल का सेवन करने से आराम मिलता है।
सर्दियों में लाभदायक
सर्दी से राहत सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है। ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को बैलेंस करना होता है। तिल और गुड़ गर्म होते हैं, ये खाने से शरीर गर्म रहता है। सर्दी के मौसम में तिल और गुड़ से बने लड्डू खाने से जुकाम और खांसी में काफी आराम मिलता है।
