... तो ये है भगवान शिव को भस्म चढ़ाने की असली वजह, जिसके चलते भगवान शिव लगाते हैं पूरे तन पर भस्म?

शिव त्रिदेवों में सबसे सर्वश्रेष्ठ. जिनका नाम लेने से ही इंसान जन्म और मृत्यु के चक्र से आजाद होकर मोक्ष को प्राप्त हो जाता है. उन्हें पाने के लिए पूजा-अनुष्ठान से लेकर तीर्थ तक लोग करते हैं. उनके सभी रूपों का ध्यान करके उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा रखते हैं. वैसे तो शिव का हर रूप सुंदर है. लेकिन अघोरी रूप सबसे खूबसूरत है. इस रूप के बारे में बतलाया जाता है कि भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं. भांग-धतूरे का सेवन कर मदमस्त रहते हैं.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनका यह रूप क्यों है? आखिर क्यों शिव चिता के भस्म को शरीर पर लगा भांग-धतूरे के नशे में मदमस्त घूमते रहते हैं? इसकी वजह है. शिव भले ही वैरागी हैं, पर वैराग्य जीवन के साथ अपने दाम्पत्य जीवन को भी निभाते हैं. भीषण रूप से क्रोधित होनेवाले शिव भावुक प्रेमी भी हैं. भस्म लगाने के पीछे का कारण उनका सती के प्रति अपार प्रेम है. आइए आपको शिव के अघोर अवतार की पूरी कहानी बताते हैं.


चिता की राख लगाते हैं महादेव
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक शिव को हमेशा श्मशान में बैठे, गले में नाग, माथे के बीच में आंख, जटाओं में चंद्रमा और मां गंगा को धारण किए हुए वर्णित किया गया है. लेकिन, उनका शरीर पर भस्‍म धारण करना भक्‍तों को बेहद चौंकाता है. भगवान शिव जो भस्‍म अपने शरीर पर लगाते हैं, वह किसी धातु या लकड़ी को जलाकर बची हुई राख नहीं होती है. दरअसल वह भस्‍म जली हुई चिताओं के बाद बची हुई राख है.

सती के विरह में भस्मधारी बने बाबा
भस्म और भगवान शिव का रिश्ता सती के प्रति उनके प्रेम से भी जुड़ा है. सती के आग में कूद कर जान देने की खबर जब शिव जी के मिली तो वह बेहद क्रोध‍त हो गए और उनके शव को लेकर भटकने लगे. उनको इस हाल में देखकर विष्‍णु जी ने सती के मृत शरीर को भस्म में बदल दिया. पत्‍नी वियोग में तड़प रहे शिव ने इस भस्‍म को अपने तन पर लगा लिया, ताकि इन कणों के जरिए सती हमेशा उनके साथ ही रहें.

खुद को मृत आत्मा से जोड़ते हैं
हिन्दू मान्यताओं में शिवजी संसार को नष्ट करने वाले हैं. हमेशा श्मशान में बैठकर मृत्यु का इंतजार करते हैं. मृत व्यक्ति को जलाने के पश्चात बची हुई राख में उसके जीवन का कोई कण शेष नहीं रहता. न उसके दुख, न सुख, न कोई बुराई और ना ही उसकी कोई अच्छाई बचती है. इसी भस्‍म को शरीर पर लगाकर भगवान शिव खुद को मृत आत्मा से जोड़ते हैं. साथ ही राख को भगवान शिव अपने तन पर लगाकर सम्मानित करते हैं, जिससे उनके सारे दोष दूर हो जाते हैं.

एक टिप्पणी भेजें

© ‧ Test. All rights reserved. Distributed by Pixabin